देशी बीज संरक्षण

कभी भारत में हर खेत सोना उगाता था, और इस सोने की ताक़त थी हमारे देशी बीज। ये बीज केवल अन्न देने वाले दाने नहीं थे, बल्कि पीढ़ियों का अनुभव, धरती की शक्ति और प्रकृति का आशीर्वाद थे। इन बीजों से पैदा हुई फसलें मौसम की मार, कीट और बीमारियों से खुद लड़ती थीं। किसानों को न तो महँगे रसायन चाहिए थे, न ही किसी विदेशी कंपनी की दया।

लेकिन जैसे ही विदेशी ताक़तों ने भारत की खेती को अपने कब्ज़े में लेने की योजना बनाई, सबसे पहला हमला हमारे बीजों पर हुआ। देशी बीजों को “पुराने और कम उत्पादन वाले” कहकर बदनाम किया गया। फिर “हाईब्रिड” और “जेनेटिकली मॉडिफ़ाइड” बीजों का लालच दिया गया, जो दिखने में अच्छे और शुरू में ज़्यादा उत्पादन देते थे, लेकिन उनमें अगली फसल के लिए बीज नहीं बचते थे। नतीजा — हर साल किसान को बीज खरीदने के लिए बाज़ार और कंपनियों के दरवाज़े पर जाना पड़ा।

इन बीजों के साथ जहरीले कीटनाशक और रासायनिक खाद भी अनिवार्य कर दिए गए। धीरे-धीरे धरती की उर्वरता घटी, पानी ज़हर बन गया, और खाने के साथ हमारे शरीर में यह ज़हर पहुँचने लगा। GMO बीजों में ऐसे रासायनिक तत्व और जीन परिवर्तन होते हैं, जो शरीर के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ते हैं। इसका असर ये हुआ कि आज पुरुषों में नपुंसकता और स्त्रियों में गर्भाशय संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।

कई वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि GMO और रसायनयुक्त अन्न के सेवन से बच्चों में जन्मजात विकार, कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता, और कैंसर जैसी बीमारियों का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है। आज छोटी उम्र में ही लड़कियों में मासिक धर्म की गड़बड़ी, PCOD, और बाँझपन जैसी समस्याएँ आम होती जा रही हैं। यह सब कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वैश्विक षड्यंत्र है — हमारी अगली पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर करने का।

हमारा संकल्प है कि हम गाँव-गाँव में देशी बीज बैंक बनाएँगे, जहाँ हर किसान अपने पूर्वजों के बीज को सुरक्षित रखेगा और बाँटेगा। इसके लिए वक्ता निर्माण महाअभियान के तहत हम ऐसे प्रशिक्षित कार्यकर्ता तैयार करेंगे जो किसानों को देशी बीजों की पहचान, संरक्षण और उपयोग की पूरी विधि सिखाएँ।

जब बीज अपने होंगे, तो खेत अपने होंगे। और जब खेत अपने होंगे, तो अन्न, स्वास्थ्य, स्वतंत्रता और राष्ट्र — सब हमारे होंगे।

देशी बीज संरक्षण – मुख्य पाँच बिंदु

  1. आने वाली पीढ़ियों पर खतरा
    बच्चों में जन्म से ही रोग, कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता, और मानसिक विकास में कमी जैसी समस्याएँ आम हो गई हैं।
  2. बीज पर हमला = किसान की गुलामी –
    हाइब्रिड और GMO बीज ने किसान को कंपनियों का गुलाम बना दिया, जिससे वह हर साल बीज खरीदने को मजबूर है।
  3. ज़हरीला अन्न, बीमार समाज –
    GMO और रासायनिक खेती से अन्न में ऐसे तत्व घुल गए हैं, जो कैंसर, मधुमेह, दिल की बीमारी और हार्मोन असंतुलन का कारण हैं।
  4. नपुंसकता और स्त्री रोग का फैलाव –
    GMO बीज और रसायन पुरुषों में नपुंसकता, और महिलाओं में गर्भाशय रोग, PCOD और बाँझपन जैसी समस्याएँ फैला रहे हैं।
  5. समाधान – देशी बीज बैंक और जनजागरण –
    गाँव-गाँव में बीज बैंक बनाकर, किसानों को देशी बीज बचाने, बाँटने और लगाने का प्रशिक्षण देकर ही खेती, सेहत और राष्ट्र बचाया जा सकता है।